दृष्टिबाधित दिव्यांग बोले
भेदभाव वाली सोच बदलें
सिखाया कमजोरी को ताकत में बदलने का हुनर
– जज्बे से शुरू किया रेडियो स्टेशन, गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में मिला स्थान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
हम देख नहीं सकते, लेकिन सामान्य लोगों से ज्यादा चीजों के महत्व को महसूस कर सकते हैं। बेशक हमारे पंख नहीं, लेकिन फिर भी हम उड़ने की इच्छा रखते हैं। हमें विशेष का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन समाज की सोच में अभी भी अक्षम ही समझा जा रहा है। भारत के कोने-कोने से दिल्ली पहुंचे दृष्टिबाधित और आंशिक दृष्टिबाधित दिव्यांगों ने यह बातें कहीं दिल्ली से जयपुर के भ्रमण के बीच इन्होंने अपने जीवन की चुनौतियां और भावनाएं साझा कीं और समाज की सोच को बदलने में मीडिया की भूमिका को अहम बताया।
दिव्यांगों के देश भ्रमण के सपने को पूरा करने में सहयोग कर रही राइजिंग स्टार टूर्स एंड ट्रैवल्स एजेंसी ने देशभर के 70 दृष्टिबाधित दिव्यांगों व स्वयंसेवकों की टीम को जयपुर भ्रमण कराया। जयपुर यात्रा में शामिल हुए अधिकतर दिव्यांग विभिन्न राज्यों के सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जयपुर पहुंचकर इस टूर की शुरुआत सिटी पैलेस से हुई। यहां इन दिव्यागों ने जाना कि जयपुर में महलों के निर्माण की नींव राजा सवाई जयसिंह ड्यौढी ने रखी और फिर उनके उत्तराधिकारियों ने इन राजमहलों के निर्माण को आगे बढ़ाया। इसी क्रम में इन स्पेशल पर्यटकों ने जयपुर के हवा महल, जल महल और आमेर का किला का भ्रमण किया।
इस टूर में चंडीगढ़ से रंजना, फरीदाबाद से दिशा, हिमाचल से अनिल शर्मा, राजस्थान से अभय चौहान, लक्ष्मी, पंजाब से पूनम, सदफ खान, लुधियाना से संदीप कौर, दिल्ली की प्रेरणा और गोमती समेत अन्य होनहार दिव्यांग शामिल थे।